Thursday, 27 August 2015

NAYE ILAKE MEIN(नये इलाके में)

मै अपने घर निकला -२ अपनी पहचान पाने को
 नये इलाके में। 

नयी दुनियाँ , नये लोग मिले- साथ ही भाषा नयी 

साँस्कृतिक नयी सबकुछ तो था नया हमारे लिए 
नये इलाके में। 

जब मैंने समझा गहरायी से-२ इस नये इलाके को 

कुछ भी नया नही पाया मै 
नये इलाके में। 

त्यैहारो और शादियों में -२ नये वस्त्र पहनना

 विषेश पकवान अपने पडोसी और मित्रो को आमंत्रित कर खिलाना 
सबकुछ हमारे क्षेत्र जैसा मिला 
नये इलाके में। 

जैसे कुछ असमाजिक तत्व-२  फिरकी ले रहा 

हमारे यहा भोले- भाले जनता को
ठीक वैसा ही मैंने पाया 
नये इलाके में।

 मै अपने क्षेत्र के लोगो को सफलता के दौड़ में -२ 

एक दूसरे को टाँग खीचते देखा
यहा सफलता के दौड़ में कदम - ताल मिलाते देखा
 नये इलाके में। 

हाँ मै लड़ते आ रहा हूँ -२ 

अशिक्षा ,बेरोजगारी ,निर्धनता जैसे अनगिनत असमाजिक बुराई से
यहा लोगो को सिमटते देखा
क्षेत्रवाद ,भाषावाद ,जातिवाद जैसे सिमित मानसिकता में 
नये इलाके में। 

परिवर्तन का ब्यार नया 

हम युवाओ को मिलकर चलाना है ,ताकि संदेश पहुँचे अनेकता में एकता
 नये इलाके में।
                                           रणजीत कुमार 

2 comments:

Unknown said...

aaj k jamane me faili kuritiyon ko bilkul sahi sahi shabdon me sajaya hai..nice poitry

DJ blog said...

well done ranjeet...Its nice to read your blog..keep writing and sharing your thought...