Saturday, 29 August 2015

Betiyo Ne Parcham Lahraya( बेटियो ने परचम लहराया)

बेटियो ने परचम लहराया

हम दो हमारे दो 
बेटा-बेटी एक समान स्लोगन बहुत अच्छा
वैवाहिक जीवन में 
अनुशरण करने  से क्यों कतराते है।
जब तक पैदा न हो बेटा 
क्रमशः दो-तीन बेटियो के पैदा होते ही
भ्रूण हत्या क्यों करवाते है ।
बेटा के पैदा होने पर थाली -ढोल बजाते है
बेटी के पैदा होने पर 
उदासी में क्यों डूब जाते है। 
तर्क देते हो
 बेटा वंश बढ़ाता  है 
 बेटी भी है तेरा ही अंश वो भी 
तेरा ही वंश बढ़ाता है। 
बेटा रूप फल की चाहत रखनेवाले 
बिना फूल के फल कभी हुआ है क्या !
कहते फिरते हो
बेटी पराये घर की लक्ष्मी होती है
एक दिन दुल्हन बन ,डोली में बैठ 
पराये घर को जाएगी,इसी तरह पराये  घर की बेटी 
 तेरे घर भी तो आएगी। 
उम्र  के ढल जाने पर
जब साथ खड़ा न होगा तेरा  बेटा 
तब बेटी परछायी बनकर सेवा करने आएगी। 
जब -जब बेटियो ने
 समानता  का अधिकार है पाया
शिक्षा,स्वस्थ्य,खेल जगत या 
एवरेस्ट की ऊची चोटी से लेकर अंतरिक्ष की उड़ान
हर क्षेत्र में  बेटियो ने परचम लहराया। 
रणजीत कुमार 

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