प्रतिदिन पुस्तकालय जाना
समाचारपत्र पढ़ना।
देश - दुनिया का खबरें तो जान लिया
मगर खुद का खबर
अखबारों में पढ़ना। ....
असंख्य पड़े पुस्तको का गहन अध्ययन कर।
ज्ञान पुंज तुम्हें हीं उत्सर्जित करना होगा।
प्रतिदिन व्यायामशाला जाना
आईने को घंटो निहारना।
दूसरे के सुगठित देख शरीर
खुद को तुलना करना।
काश !आहे भरना बंद करो।
व्यायामशाला में पड़े औजारों से खेलना
शुरुवात तुम्हें ही करना है।
रणजीत कुमार
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