माँ का दुलारा है ,तू
उनकी आँखो का तारा है ,तू
तेरे खुशियों से चमकते आँखो के खातिर
माँ अपनी नम आँखे छिपाकर
हर ज़िद्द को है ,पूरा किया
जब भी कोई छोटी- बड़ी कामयाबी पाया
माँ अपनी आँखो से खुशियों की मोतियाँ है ,लुटाई
हे ! माँ का दुलारा
है तुम से विनम्र निवेदन
कभी भी पथरीली आँखे
अपनी माँ के ऊपर मत दिखलाना
रणजीत कुमार

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