Wednesday, 2 September 2015

Hay ! Mazduro Ki Mazburi(हाय ! मजदूरो की मज़बूरी)

 किसानो के संग खेतो में मजदूरी कर 
फसलो को लह-लहाया है 
फिर भी अपने परिवार को
दो वक़्त की रोटी ,जुटा न पाया। 
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
बड़े -बड़े भवन -ईमारत के निर्माण में 
अपने खून -पसीनें के मिश्रण से तैयार किया 
पर हल्की वर्षा होने पर 
अपने ही घर में बैठने की जगह नहीं। 
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
बड़े से  लेकर छोटे  औद्योगिक  -कारखानो में
 12 से 18 घंटे तक
मजदूरी कर प्रोडक्शन  को बढ़ाया है 
पर वाज़िब मजदूरी ठेकेदारो ने ही उठाया है। 
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
सोचा था मज़दूरी कर सारे 
 कर्ज चुकाऊगा और पक्के की मकान बनाऊगा 
अब बेटिया हो गयी सयानी 
 उसकी ब्याह की चिंता सताती है  
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
इसी बीच पिता जी की हो गयी देहांत
गॉँव समाज के लोग बुरा न कहे 
इसलिए मजदूरी की कमाई  का पैसा
 पिताजी के क्रिया-कर्म में किया है खर्च 
अब तो और भी चिन्ता सताती है। 
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
अब उम्र के ढल जाने से मजदूरी करने की ताकत न रहा 
अधूरे सपने को पूरा करने के लिए
अब बेटे को मजदूरी का  काम आगे बढ़ाना  होगा 
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
         
रणजीत कुमार 


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