Tuesday, 29 September 2015
Tuesday, 8 September 2015
Wednesday, 2 September 2015
Hay ! Mazduro Ki Mazburi(हाय ! मजदूरो की मज़बूरी)
किसानो के संग खेतो में मजदूरी कर
फसलो को लह-लहाया है
फिर भी अपने परिवार को
दो वक़्त की रोटी ,जुटा न पाया।
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
बड़े -बड़े भवन -ईमारत के निर्माण में
अपने खून -पसीनें के मिश्रण से तैयार किया
पर हल्की वर्षा होने पर
अपने ही घर में बैठने की जगह नहीं।
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
बड़े से लेकर छोटे औद्योगिक -कारखानो में
12 से 18 घंटे तक
मजदूरी कर प्रोडक्शन को बढ़ाया है
पर वाज़िब मजदूरी ठेकेदारो ने ही उठाया है।
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
सोचा था मज़दूरी कर सारे
कर्ज चुकाऊगा और पक्के की मकान बनाऊगा
अब बेटिया हो गयी सयानी
उसकी ब्याह की चिंता सताती है।
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
इसी बीच पिता जी की हो गयी देहांत
गॉँव समाज के लोग बुरा न कहे
इसलिए मजदूरी की कमाई का पैसा
पिताजी के क्रिया-कर्म में किया है खर्च
अब तो और भी चिन्ता सताती है।
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
अब उम्र के ढल जाने से मजदूरी करने की ताकत न रहा
अधूरे सपने को पूरा करने के लिए
अब बेटे को मजदूरी का काम आगे बढ़ाना होगा
हाय ! मजदूरो की मज़बूरी
Saturday, 29 August 2015
Betiyo Ne Parcham Lahraya( बेटियो ने परचम लहराया)
बेटियो ने परचम लहराया
हम दो हमारे दो
बेटा-बेटी एक समान स्लोगन बहुत अच्छा
बेटा-बेटी एक समान स्लोगन बहुत अच्छा
वैवाहिक जीवन में
अनुशरण करने से क्यों कतराते है।
अनुशरण करने से क्यों कतराते है।
जब तक पैदा न हो बेटा
क्रमशः दो-तीन बेटियो के पैदा होते ही
भ्रूण हत्या क्यों करवाते है ।
क्रमशः दो-तीन बेटियो के पैदा होते ही
भ्रूण हत्या क्यों करवाते है ।
बेटा के पैदा होने पर थाली -ढोल बजाते है
बेटी के पैदा होने पर
उदासी में क्यों डूब जाते है।
बेटी के पैदा होने पर
उदासी में क्यों डूब जाते है।
तर्क देते हो
बेटा वंश बढ़ाता है
बेटी भी है तेरा ही अंश वो भी
तेरा ही वंश बढ़ाता है।
बेटी भी है तेरा ही अंश वो भी
तेरा ही वंश बढ़ाता है।
बेटा रूप फल की चाहत रखनेवाले
बिना फूल के फल कभी हुआ है क्या !
बिना फूल के फल कभी हुआ है क्या !
कहते फिरते हो
बेटी पराये घर की लक्ष्मी होती है
एक दिन दुल्हन बन ,डोली में बैठ
पराये घर को जाएगी,इसी तरह पराये घर की बेटी
तेरे घर भी तो आएगी।
एक दिन दुल्हन बन ,डोली में बैठ
पराये घर को जाएगी,इसी तरह पराये घर की बेटी
तेरे घर भी तो आएगी।
उम्र के ढल जाने पर
जब साथ खड़ा न होगा तेरा बेटा
तब बेटी परछायी बनकर सेवा करने आएगी।
जब साथ खड़ा न होगा तेरा बेटा
तब बेटी परछायी बनकर सेवा करने आएगी।
जब -जब बेटियो ने
समानता का अधिकार है पाया
समानता का अधिकार है पाया
शिक्षा,स्वस्थ्य,खेल जगत या
एवरेस्ट की ऊची चोटी से लेकर अंतरिक्ष की उड़ान
एवरेस्ट की ऊची चोटी से लेकर अंतरिक्ष की उड़ान
हर क्षेत्र में बेटियो ने परचम लहराया।
रणजीत कुमार
Thursday, 27 August 2015
NAYE ILAKE MEIN(नये इलाके में)
मै अपने घर निकला -२ अपनी पहचान पाने को
नये इलाके में।
नये इलाके में।
नयी दुनियाँ , नये लोग मिले- साथ ही भाषा नयी
साँस्कृतिक नयी सबकुछ तो था नया हमारे लिए
नये इलाके में।
जब मैंने समझा गहरायी से-२ इस नये इलाके को
कुछ भी नया नही पाया मै
नये इलाके में।
त्यैहारो और शादियों में -२ नये वस्त्र पहनना
विषेश पकवान अपने पडोसी और मित्रो को आमंत्रित कर खिलाना
सबकुछ हमारे क्षेत्र जैसा मिला
नये इलाके में।
जैसे कुछ असमाजिक तत्व-२ फिरकी ले रहा
हमारे यहा भोले- भाले जनता को
ठीक वैसा ही मैंने पाया
नये इलाके में।
मै अपने क्षेत्र के लोगो को सफलता के दौड़ में -२
एक दूसरे को टाँग खीचते देखा
यहा सफलता के दौड़ में कदम - ताल मिलाते देखा
नये इलाके में।
मै अपने क्षेत्र के लोगो को सफलता के दौड़ में -२
एक दूसरे को टाँग खीचते देखा
यहा सफलता के दौड़ में कदम - ताल मिलाते देखा
नये इलाके में।
हाँ मै लड़ते आ रहा हूँ -२
अशिक्षा ,बेरोजगारी ,निर्धनता जैसे अनगिनत असमाजिक बुराई से
यहा लोगो को सिमटते देखा
क्षेत्रवाद ,भाषावाद ,जातिवाद जैसे सिमित मानसिकता में
नये इलाके में।
परिवर्तन का ब्यार नया
हम युवाओ को मिलकर चलाना है ,ताकि संदेश पहुँचे अनेकता में एकता
नये इलाके में।
रणजीत कुमार
Subscribe to:
Comments (Atom)


